RATIONALIST INTERNATIONAL

http://www.rationalistinternational.net

चिकन हड्डियां (टोटका )और काले जादू में कोई सच्चाई नहीं

टाइम्स ऑफ इंडिया

२ मई २०१०

सनल इडामारूकू

(प्रसीडेंट, इंडियन रेशनलिस्ट एसोसिएशन)

मैं कई वर्षों से अंधविश्वासों के खिलाफ अभियान चला रहा हूँ,मुझे यकीन है कि यह भारत के विकास में सबसे विनाशकारी बाधा है|

सबसे पहले मैं एक सलाह के साथ अपनी बात की शुरुआत करता हूँ| मान लीजिये अगर एक दिन आप को पता चलता है कि तुम्हारे कट्टर दुश्मन ने तुम्हें मारने के लिए तांत्रिक को पैसे दिए हैं| इसके लिए हो सकता है वो तुम्हारे ऊपर रूमाल प्रयोग करे या तुम्हे बांधे या छूने का प्रयास करे, तो इन सब से घबराना मत ये काउंटर जादू है जिससे तुम अपनी जान बचा सकते हो| इसके लिए जरुरी है,बस हँसते रहो,चाहे वो कब्रिस्तान मैं आधी रात को आग पर मंत्र पढ़े या रुमाल से कुछ भी नुकसान पहुँचाने की कोशिश करे| ये मनोवैज्ञानिक तरीके से आप के अंदर डर का माहौल पैदा कर देतें हैं,जो भी हो जरुरी है आप डरे नहीं आप को कोई नुकसान नहीं होगा| यदि आप डर गए तो हो सकता है इस डर के कारण आप मर जाओ|

मार्च २००८ में,मुझे इस बात को साबित करने का एक मौका मिला था| इंडिया टीवी ने एक परिचर्चा आयोजित की थी "तंत्र शक्ति बनाम विज्ञान" मेरे प्रतिद्वंद्वी पंडित सुरिंदर शर्मा ने दावा किया था कि वो मुझे मारने में तीन मिनिट का समय लेंगे| और वो अपने मंत्र की शक्ति द्वारा किसी को भी तीन मिनिट में मार सकते हैं| मैंने उसकी चुनौती को स्वीकार किया कि,वो मुझे मार कर दिखाए और फिर कोशिश शुरू हुई| उसने मेरे ऊपर प्रयोग करने शुरू किये| दो घंटे के थकाऊ मन्त्र " ओम लिंगलिंगलिंगलिंगा, किलिकिलिकिली .........." के बाद भी में जीवित रहा | लेकिन ये कार्यक्रम चलता रहा और मध्य रात्रि में ये स्टूडियो के अंदर से खुले आसमान के नीचे आ गया| "अंतिम विनाश अभियान " के साथ तांत्रिक ने काले जादू शस्त्रागार की पूरी सामग्री निकाल कर आग में डाल दी और क्रोधित हो कर आटे का पुतला जो मुझे प्रतिनिधित्व कर रहा था,को मसल कर आग में झोंक दिया| इस सब का मुझ पर कोई भी असर नहीं हुआ और होना भी नहीं था,तो फिर मंत्र और चिकन हड्डियों (टोटका) से किसी की मौत कैसे हो सकती है|

अंधविश्वास और रुढ़िवादी मान्यताओं से विमुक्ति

आज हम उस युग में रह रहें हैं जहां वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीय क्रांतियों ने हमारे रहन सहन और सोच को बदल दिया है| आज पूरी दुनिया सिर्फ एक फोन कॉल की दूरी पर है| आज विकसित संचार सुविधाओं के कारण सीमाएं खत्म हो रहीं हैं,पुराने एकाधिकार और विशेषाधिकार टूट रहे हैं, पुराने सामाजिक बंधन से मुक्त हो रहे हैं| ये एक बहुत अच्छा समय है,जब हम अपने पुराने अंधविश्वासों और आदिवासी रुढ़िवादी मान्यताओं,जो हमारे मन में बसी हैं,से दूर जा सकते हैं, उसकी सोच बदल सकते हैं और इसकी जटिलता को समझने की कोशिश कर सकते हैं| इन रुढ़िवादी मान्यतों से बाहर निकलकर हम अपनी जिन्दगी में सुधार कर,इसे और खूबसूरत बना सकते हैं| अपने जीवन को संतुलित,खुद की क्षमताओं का विकास,मजबूत,जिम्मेदार और आत्मविश्वास के साथ खुश रह सकते हैं| ये कोई व्यक्तिगत मामला नहीं है,ये भारत की तरक्की और विकास के लिए एक बहुत अच्छा तरीका है,जिससे भारत विकसित देशों के साथ आगे बढ़ सके और ये संसार में मजबूत ताकत के रूप में आ कर विश्व में अपना नेतृत्व कर सके|

कई जो अपनी लम्बी बीमारी से बाहर निकलना चाहते हैं उनके लिए,ये लोग असुरक्षा और डर की भावना पैदा कर देते हैं| जो लोग अपने बचपन के भय और कमजोरियों से दूर नहीं जा पाते वो आजीवन भूत और आत्माओं की विचित्र दुनिया में फंस कर रह जाते हैं,ये लोग तांत्रिकों और बाबाओं के लिए आदर्श ग्राहक होते हैं| ये तांत्रिक उनकी भय और असुरक्षा का फायदा उठाने के लिए जरा भी नहीं चूकते|

सच्चाई की ओर एक अप्रत्याशित कदम

मैं कई दशकों से अंधविश्वास के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा हूँ| मैं इस बात से आश्वस्त हूँ कि यह लोगों के जीवन और भारत के विकास के लिए सबसे विनाशकारी शक्ति है| मेरी एक "अलौकिक" धूर्त के साथ मुठभेड़ बहुत ही दिलचस्प थी और इंडिया टीवी के " ग्रेट तंत्र चैलेंज" से अधिक खतरनाक| एक बाल्टी बाबा,जो एक शीर्ष नेता के पुनर्निर्वाचन के लाभ के लिए आग में चल कर दिखा रहे थे,जब मैंने उसे सार्वजानिक रूप से उजागर किया तो वह क्रोधित हो गए और गुस्से में मेरे चेहरे पर जलते हुये मिट्टी के बर्तन को फेंक दिया| मैं बाल बाल बच गया लेकिन टीवी कैमरों में मेरी ये घटना कैद हो गयी| मुझे कुछ मामूली छाले हो गए लेकिन बाबा के हाथ काफी जल गए थे| इस घटना के बाद बाबा कभी जनता को दिखाई नहीं दिए|

इस तरह के प्राणियों में,मैं पंडित सुरिंदर शर्मा को एक खास जगह देता हूँ| कुछ हद तक वह एक राष्ट्रीय प्रसारण लाइव कार्यक्रम में हमारे ऊपर किये गए काला जादू प्रयोग के नतीजे को बहुत देर से समझे| उस रात उसके अपने कैरियर का अंत हो गया| वह मुझे मार तो नहीं पाया,लेकिन न चाहते हुए उसने मेरी मदद की| उसके कारण मैं लाखों दर्शकों के मन में ये रौशनी डाल सका और सिद्ध कर सका कि इस काले जादू में कोई सच्चाई नहीं है| मैं उन लोंगों का शुक्रगुजार हूँ जिन्होंने उस रात इस कार्यक्रम को देखा और इस अंधविश्वास से बाहर आये| अगर आप यह कार्यक्रम देखना चूक गए हैं, तो आप यू ट्यूब पर देख सकते हैं|

हिंदी अनुवादक : दीपाली सिन्हा

click & watch click & watch click & watch